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हैरान कौ अंग / कबीर
पंडित सेती कहि रहे, कह्या न मानै कोइ।
ओ अगाध एका कहै, भारी अचिरज होइ॥1॥
बसे अपंडी पंड मैं, ता गति लषै न कोइ।
कहै कबीरा संत हौ, बड़ा अचम्भा मोहि॥2॥
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बन्दर और लकड़ी का खूंटा / मित्रभेद-पंचतंत्र / पं. विष्णु शर्मा (The Monkey and The Wedge Story In Hindi)
एक समय शहर से कुछ ही दूरी पर एक मंदिर का निर्माण किया जा रहा था। मंदिर में लकडी का काम बहुत था इसलिए लकडी चीरने वाले बहुत से मज़दूर काम ...
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लड़ते बकरे और सियार / मित्रभेद-पंचतंत्र / पं. विष्णु शर्मा (Fighting Goats & The Jackal)
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